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Monday, February 13, 2012

ना जाने  क्यूँ,
कह ना सका,
अपने सतरंगी सपने,
सजा ना सका,
और बसंत आने से ही पहले, 
हार चुका था ,
मैं लफ्जों के खेल में,
यही थी मेरी पहली, आखिरी ,
हार !





Saturday, November 19, 2011

एक हल्की सी मुश्कुराहट चेहरे को गुलाबी रंगत, आँखों में चमक और कलेजे को ठंडक देती है,
 इसलिए मुस्कुरा कर जरुर देखे.
 


कहते है--- प्यार अँधा होता है.
              और शादी  आँखें खोल देती है.
 

Friday, November 18, 2011

अगर गिरने लगू तो वोह आकर संभाले मुझे,
हमें अपने जहा में कोई ऐसा शख्स नहीं देखा.
नहीं

Wednesday, November 16, 2011

कितने चेहरों में सरे राह वह मिलता है हमें,
एक मुद्दत से जिसे  हमने भुला रखा है.

वह 

Sunday, November 13, 2011

आज भी याद है मुझे. हनुमान मंदिर , किदवई नगर , कानपुर.
तुम्हारा इंतज़ार करना, मिलना और Engg. college चले जाना,
वक़्त गुजरा, तुम  दूर हो गयी लेकिन यादें अभी भी ताज़ा है,
शायद तुम्हे यकीन न हो की मै तब से  कानपुर आया ही नहीं...........
लेकिन अब भी मेरी यादों की सडक लेबर कालोनी , हनुमान मंदिर,
किदवई नगर, कानपुर तक जाती है.


 तुम्हारी यादें
 

Monday, September 12, 2011

भ्रस्टाचार ने ली एक टीचर  की जान,
.   ८-९-२०११, पिछले ३८ महीनो से वेतन न मिलने की वजह से गाजी पुर (उ.प.) के रहने वाले मदरसा SPQEM            टीचर एकरामुल हक अंसारी,  जो कि मदरसा फैज़नुल उलूम, बहादुरगंज के रहने वाले थे, ने आत्महत्या कर ली मदरसा गाजीपुर के टीचर्स का कहना है कि गाजीपुर जिले कि इस टीचर की सलारी पिछले ६ माह की आई थी और गाजीपुर के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने तनख्वाह देने के एवज में आधी तनख्वाह घूस में मांग ली और घूस न मिलने पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने तनख्वाह नहीं दी. तंग आकर टीचर ने आत्महत्या कर ली.
       जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, गाजीपुर और वक्फ लिपिक मोहम्मद अमजद के खिलाफ कारवाही करने के लिए आप सभी लोग आगे आये.